शुभ पंचांग लोगो
सितंबर , २०२६ मंगलवार
ToranToran

४ अप्रैल २०२७ का पंचांग

रवि
सोम
मंगल
बुध
गुरु
शुक्र
शनि
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वद १०
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वद ११
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वद १२
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वद १३
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वद १४
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वद १५
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सुद १
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सुद २
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सुद ३
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सुद ४
१०
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सुद ५
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सुद ६
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सुद ७
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सुद ८
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सुद ९
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सुद १०
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सुद ११
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सुद १२
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२०
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वद १
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वद ४
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वद ५
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वद ५
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वद ६
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वद ७
२८
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वद ८
२९
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वद ९
३०

अप्रैल, २०२७

रविवार

फागुन वद त्रयोदशी

विक्रम संवत २०८३

चंद्रमा

सूर्योदय और सूर्यास्त

सूर्योदय:०६:३० AM
सूर्यास्त:०६:५५ PM

त्योहार और छुट्टियां

आज कोई त्यौहार या छुट्टी नहीं है

राशि

तिथि

वद द्वादशी
०४:२६ पूर्वाह्न
वद त्रयोदशी

नक्षत्र

शतभिषा
०४:३३ अपराह्न
पूर्वभाद्रपद

योग

शुभ
१०:१२ पूर्वाह्न
शुक्ल

दैनिक पंचांग विवरण

ब्रह्म मुहूर्त:०४:५४ AM - ०५:४२ AM
राहु काल:०५:२२ PM - ०६:५५ PM
यमगण्ड काल:१२:४२ PM - ०२:१६ PM
प्रातः सन्ध्या:०५:२६ AM - ०६:३० AM
मध्याह्न सन्ध्या:१२:०६ PM - ०१:१८ PM
सायं सन्ध्या:०६:५५ PM - ०७:५९ PM
करण:वाणिज (०४:२६ पूर्वाह्न बजे तक)
दूसरा करण:विष्टि (०४:२६ पूर्वाह्न बजे के बाद)
अभिजीत मुहूर्त:१२:१८ PM - ०१:०७ PM
पक्ष: कृष्ण पक्ष (अंधेरा)
अमान्त माह: फाल्गुन
पूर्णिमांत माह: चैत्र
शक संवत: १९४८
विक्रम संवत: २०८३
गुजराती संवत: २०८३

इस महीने आने वाले त्यौहार और छुट्टियाँ

अप्रैल फूल दिवस:१ अप्रैल (गुरुवार)
पापमोचनी एकादशी:२ अप्रैल (शुक्रवार)
गुड फ्राइडे:३ अप्रैल (शनिवार)
गुडी पडवा:७ अप्रैल (बुधवार)
उगादी:७ अप्रैल (बुधवार)
चेटीचंद:७ अप्रैल (बुधवार)
विश्व स्वास्थ्य दिवस:७ अप्रैल (बुधवार)
आज दूसरा शनिवार होने के कारण बैंक बंद रहेगा।:१० अप्रैल (शनिवार)
वैसाखी:१४ अप्रैल (बुधवार)
डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर जयंती:१४ अप्रैल (बुधवार)
राम नवमी:१५ अप्रैल (गुरुवार)
कामदा एकादशी:१७ अप्रैल (शनिवार)
हनुमान जन्मोत्सव (हनुमान जयंती):२० अप्रैल (मंगलवार)
विश्व पुस्तक दिवस:२३ अप्रैल (शुक्रवार)
आज चौथा शनिवार होने के कारण बैंक बंद रहेगा।:२४ अप्रैल (शनिवार)

४ अप्रैल २०२७ का पंचांग

४ अप्रैल २०२७ को रविवार है। यह दिन फाल्गुन मास, कृष्ण पक्ष में आता है। आज की तिथि कृष्ण पक्ष द्वादशी है, जो ०४:२६ पूर्वाह्न तक रहेगी; इसके बाद कृष्ण पक्ष त्रयोदशी प्रारंभ होगी। इस दिन का नक्षत्र शतभिषा है, जो ०४:३३ अपराह्न के बाद पूर्वभाद्रपद में बदलेगा। राहु काल ०५:२२ PM से ०६:५५ PM तक रहेगा।

वाररविवार
माहअप्रैल २०२७
तिथिद्वादशी (०४:२६ पूर्वाह्न तक; फिर त्रयोदशी)
नक्षत्रशतभिषा (०४:३३ अपराह्न तक; फिर पूर्वभाद्रपद)
योगशुभ (१०:१२ पूर्वाह्न तक; फिर शुक्ल)
करणवाणिज (०४:२६ पूर्वाह्न तक; फिर विष्टि)
पक्षकृष्ण
मासफाल्गुन
राहु काल०५:२२ PM – ०६:५५ PM
गुलिक काल०३:४९ PM – ०५:२२ PM
यमगण्ड काल१२:४२ PM – ०२:१६ PM
अभिजीत मुहूर्त१२:१८ PM – ०१:०७ PM
ब्रह्म मुहूर्त०४:५४ AM – ०५:४२ AM
सूर्योदय०६:३० AM
सूर्यास्त०६:५५ PM
चंद्र राशिकुंभ (१२:०० पूर्वाह्न तक)
शुभ रंगलाल
विक्रम संवत२०८३
शक संवत१९४८

४ अप्रैल २०२७ को क्या है?

४ अप्रैल २०२७ को रविवार है। इस दिन का नक्षत्र शतभिषा, योग शुभ, चंद्र राशि कुंभ है।

४ अप्रैल २०२७ को कौन-सी तिथि है?

४ अप्रैल २०२७ को कृष्ण पक्ष द्वादशी तिथि है। यह तिथि ०४:२६ पूर्वाह्न तक रहेगी। इसके बाद कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होगी। सभी द्वादशी तिथियाँ देखें। आज की सटीक तिथि और उसका समय जानने के लिए आज की तिथि पेज देखें।

४ अप्रैल २०२७ का नक्षत्र क्या है?

४ अप्रैल २०२७ का नक्षत्र शतभिषा है। ०४:३३ अपराह्न के बाद पूर्वभाद्रपद नक्षत्र प्रारंभ होगा। नक्षत्र चंद्रमा की आकाशीय स्थिति को दर्शाता है और पूजा, विवाह एवं यात्रा के मुहूर्त में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

४ अप्रैल २०२७ का राहु काल क्या है?

४ अप्रैल २०२७ का राहु काल ०५:२२ PM से ०६:५५ PM तक है। राहु काल में शुभ कार्य, यात्रा और नए उपक्रम आरंभ करने से बचना चाहिए। शुभ चौघड़िया देखने के लिए चौघड़िया पृष्ठ देखें।

४ अप्रैल २०२७ का शुभ मुहूर्त क्या है?

४ अप्रैल २०२७ का अभिजीत मुहूर्त १२:१८ PM से ०१:०७ PM तक है — यह दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ काल माना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त ०४:५४ AM से ०५:४२ AM तक है, जो ध्यान, पूजा और सकारात्मक कार्यों के लिए उत्तम है। विस्तृत मुहूर्त सूची के लिए शुभ मुहूर्त पृष्ठ देखें।

४ अप्रैल २०२७ के शुभ और अशुभ समय

शुभ समय: अभिजीत मुहूर्त (१२:१८ PM – ०१:०७ PM), ब्रह्म मुहूर्त (०४:५४ AM – ०५:४२ AM), शुभ रंग लाल
अशुभ समय: राहु काल (०५:२२ PM – ०६:५५ PM), गुलिक काल (०३:४९ PM – ०५:२२ PM), यमगण्ड काल (१२:४२ PM – ०२:१६ PM)।

क्या ४ अप्रैल २०२७ का पंचांग शहर के अनुसार बदलता है?

हाँ, ४ अप्रैल २०२७ का पंचांग शहर के अनुसार बदल सकता है। पंचांग की गणना सूर्योदय, सूर्यास्त और ग्रहों की स्थिति पर आधारित होती है, जो हर स्थान पर अलग होती है। शुभ पंचांग चयनित शहर के अनुसार सटीक पंचांग प्रदान करता है।

४ अप्रैल २०२७ का पंचांग कैसे गणना किया जाता है?

पंचांग की गणना दृक गणित पद्धति पर आधारित है, जो सूर्योदय, सूर्यास्त और ग्रहों की वास्तविक खगोलीय स्थितियों का उपयोग करती है। तिथि चंद्रमा और सूर्य के कोणीय अंतर से, नक्षत्र चंद्र की राशि स्थिति से, और योग दोनों ग्रहों की संयुक्त गति से निर्धारित होता है।

पंचांग क्या है और इसका महत्व क्या है?

पंचांग वैदिक समय गणना प्रणाली है, जो तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार के आधार पर दिन की शुभता और अशुभता को दर्शाती है। इसका उपयोग पूजा, व्रत, मुहूर्त, यात्रा और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए किया जाता है।

पंचांग क्या है, इसे कैसे पढ़ें और इसका महत्व विस्तार से समझने के लिए यहाँ पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

४ अप्रैल २०२७ को कौन-सी तिथि है?

४ अप्रैल २०२७ को क्या है?

४ अप्रैल २०२७ का नक्षत्र क्या है?

४ अप्रैल २०२७ का राहु काल क्या है?

४ अप्रैल २०२७ का शुभ मुहूर्त क्या है?

४ अप्रैल २०२७ के शुभ और अशुभ समय

४ अप्रैल २०२७ का पंचांग शहर के अनुसार बदलता है?

४ अप्रैल २०२७ का पंचांग कैसे गणना किया जाता है?

पंचांग क्या है और इसका महत्व क्या है?