श्रावण वद चतुर्थी - विक्रम संवत २०८३
काल (नुकसान): ०२:१४ PM - ०३:४८ PM
शुभ (अच्छा): ०३:४८ PM - ०५:२२ PM


२०२६ की द्वादशी तिथियाँ
द्वादशी २०२६ – भगवान विष्णु को समर्पित पवित्र तिथि
द्वादशी तिथि हिंदू पंचांग में अत्यंत पवित्र और शुभ मानी जाती है। यह चंद्र मास की बारहवीं तिथि होती है और विशेष रूप से भगवान विष्णु को समर्पित है।
एकादशी के बाद आने वाली द्वादशी को व्रत पूर्ण करने का दिन माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, दान और धार्मिक कार्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
द्वादशी का महत्व
शास्त्रों के अनुसार द्वादशी तिथि भगवान विष्णु की पूजा के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। द्वादशी व्रत का पालन करने से पापों का नाश होता है और आध्यात्मिक पुण्य प्राप्त होता है।
मान्यता है कि द्वादशी का व्रत मोक्ष प्राप्ति के मार्ग को प्रशस्त करता है।
शास्त्रों में द्वादशी का वर्णन
मनुस्मृति, पद्म पुराण, स्कंद पुराण और विष्णु धर्मोत्तर पुराण में द्वादशी तिथि के महत्व का विस्तृत वर्णन मिलता है।
इस दिन स्नान, दान, मंत्र जाप, हवन और उपवास करने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है।
द्वादशी और भगवान विष्णु के अवतार
पुराणों के अनुसार कई द्वादशी तिथियाँ भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों से जुड़ी हैं।
जैसे कूर्म द्वादशी कूर्म अवतार से, मत्स्य द्वादशी मत्स्य अवतार से और परशुराम द्वादशी भगवान परशुराम से संबंधित है।
द्वादशी कब आती है?
द्वादशी हिंदू पंचांग के बारहवें चंद्र दिवस पर आती है और आमतौर पर एकादशी के उपवास के बाद आती है।
द्वादशी पर किस देवता की पूजा की जाती है?
द्वादशी भगवान विष्णु को समर्पित है। भक्त विष्णु जी की पूजा करते हैं आशीर्वाद, समृद्धि और आध्यात्मिक विकास के लिए।



