शुभ पंचांग लोगो
सितंबर , २०२६ मंगलवार
ToranToran

२०२६ की द्वादशी तिथियाँ

पौष
सुद द्वादशी
१ घंटा ४८ मिनट
प्रारंभ
जनवरी ०१, २०२६
१२:०० पूर्वाह्न
गुरुवार
समाप्त
जनवरी ०१, २०२६
०१:४८ पूर्वाह्न
गुरुवार
पौष
वद द्वादशी
१ दिन २ घंटे
प्रारंभ
जनवरी १४, २०२६
०५:५२ अपराह्न
बुधवार
समाप्त
जनवरी १५, २०२६
०८:१६ अपराह्न
गुरुवार
माघ
सुद द्वादशी
२१ घंटे १३ मिनट
प्रारंभ
जनवरी २९, २०२६
०१:५५ अपराह्न
गुरुवार
समाप्त
जनवरी ३०, २०२६
११:०९ पूर्वाह्न
शुक्रवार
माघ
वद द्वादशी
१ दिन २ घंटे
प्रारंभ
फ़रवरी १३, २०२६
०२:२६ अपराह्न
शुक्रवार
समाप्त
फ़रवरी १४, २०२६
०४:०१ अपराह्न
शनिवार
फाल्गुन
सुद द्वादशी
२० घंटे ४३ मिनट
प्रारंभ
फ़रवरी २८, २०२६
१२:०० पूर्वाह्न
शनिवार
समाप्त
फ़रवरी २८, २०२६
०८:४३ अपराह्न
शनिवार
फाल्गुन
वद द्वादशी
१ दिन ० घंटे
प्रारंभ
मार्च १५, २०२६
०९:१६ पूर्वाह्न
रविवार
समाप्त
मार्च १६, २०२६
०९:४० पूर्वाह्न
सोमवार
चैत्र
सुद द्वादशी
२३ घंटे २३ मिनट
प्रारंभ
मार्च २९, २०२६
०७:४६ पूर्वाह्न
रविवार
समाप्त
मार्च ३०, २०२६
०७:०९ पूर्वाह्न
सोमवार
चैत्र
वद द्वादशी
२३ घंटे ३ मिनट
प्रारंभ
अप्रैल १४, २०२६
०१:०८ पूर्वाह्न
मंगलवार
समाप्त
अप्रैल १५, २०२६
१२:१२ पूर्वाह्न
बुधवार
वैशाख
सुद द्वादशी
१ दिन १ घंटा
प्रारंभ
अप्रैल २७, २०२६
०६:१६ अपराह्न
सोमवार
समाप्त
अप्रैल २८, २०२६
०६:५२ अपराह्न
मंगलवार
वैशाख
वद द्वादशी
२१ घंटे ५० मिनट
प्रारंभ
मई १३, २०२६
०१:३० अपराह्न
बुधवार
समाप्त
मई १४, २०२६
११:२० पूर्वाह्न
गुरुवार
अधिक ज्येष्ठ
सुद द्वादशी
१ दिन २ घंटे
प्रारंभ
मई २७, २०२६
०६:२२ पूर्वाह्न
बुधवार
समाप्त
मई २८, २०२६
०७:५७ पूर्वाह्न
गुरुवार
अधिक ज्येष्ठ
वद द्वादशी
१९ घंटे ३६ मिनट
प्रारंभ
जून १२, २०२६
१२:०० पूर्वाह्न
शुक्रवार
समाप्त
जून १२, २०२६
०७:३६ अपराह्न
शुक्रवार
ज्येष्ठ
सुद द्वादशी
१ दिन २ घंटे
प्रारंभ
जून २५, २०२६
०८:०९ अपराह्न
गुरुवार
समाप्त
जून २६, २०२६
१०:२२ अपराह्न
शुक्रवार
ज्येष्ठ
वद द्वादशी
२० घंटे ४१ मिनट
प्रारंभ
जुलाई ११, २०२६
०५:२२ पूर्वाह्न
शनिवार
समाप्त
जुलाई १२, २०२६
०२:०४ पूर्वाह्न
रविवार
आषाढ़
सुद द्वादशी
१ दिन २ घंटे
प्रारंभ
जुलाई २५, २०२६
११:३४ पूर्वाह्न
शनिवार
समाप्त
जुलाई २६, २०२६
०१:५७ अपराह्न
रविवार
आषाढ़
वद द्वादशी
२० घंटे ५५ मिनट
प्रारंभ
अगस्त ०९, २०२६
११:०५ पूर्वाह्न
रविवार
समाप्त
अगस्त १०, २०२६
०८:०० पूर्वाह्न
सोमवार
श्रावण
सुद द्वादशी
१ दिन २ घंटे
प्रारंभ
अगस्त २४, २०२६
०४:१८ पूर्वाह्न
सोमवार
समाप्त
अगस्त २५, २०२६
०६:२० पूर्वाह्न
मंगलवार
श्रावण
वद द्वादशी
२१ घंटे ३८ मिनट
प्रारंभ
सितंबर ०७, २०२६
०५:०४ अपराह्न
सोमवार
समाप्त
सितंबर ०८, २०२६
०२:४२ अपराह्न
मंगलवार
भाद्रपद
सुद द्वादशी
१ दिन १ घंटा
प्रारंभ
सितंबर २२, २०२६
०९:४३ अपराह्न
मंगलवार
समाप्त
सितंबर २३, २०२६
१०:५० अपराह्न
बुधवार
भाद्रपद
वद द्वादशी
२३ घंटे २५ मिनट
प्रारंभ
अक्टूबर ०७, २०२६
१२:३४ पूर्वाह्न
बुधवार
समाप्त
अक्टूबर ०७, २०२६
११:५९ अपराह्न
बुधवार
आश्विन
सुद द्वादशी
२३ घंटे ४७ मिनट
प्रारंभ
अक्टूबर २२, २०२६
०२:४८ अपराह्न
गुरुवार
समाप्त
अक्टूबर २३, २०२६
०२:३५ अपराह्न
शुक्रवार
आश्विन
वद द्वादशी
२३ घंटे ५४ मिनट
प्रारंभ
नवंबर ०५, २०२६
१०:३५ पूर्वाह्न
गुरुवार
समाप्त
नवंबर ०६, २०२६
१०:३० पूर्वाह्न
शुक्रवार
कार्तिक
सुद द्वादशी
२२ घंटे २४ मिनट
प्रारंभ
नवंबर २१, २०२६
०६:३१ पूर्वाह्न
शनिवार
समाप्त
नवंबर २२, २०२६
०४:५६ पूर्वाह्न
रविवार
कार्तिक
वद द्वादशी
१ दिन १ घंटा
प्रारंभ
दिसंबर ०४, २०२६
११:४४ अपराह्न
शुक्रवार
समाप्त
दिसंबर ०६, २०२६
१२:५२ पूर्वाह्न
रविवार
मार्गशीर्ष
सुद द्वादशी
२१ घंटे २१ मिनट
प्रारंभ
दिसंबर २०, २०२६
०८:१४ अपराह्न
रविवार
समाप्त
दिसंबर २१, २०२६
०५:३६ अपराह्न
सोमवार

द्वादशी २०२६ – भगवान विष्णु को समर्पित पवित्र तिथि

द्वादशी तिथि हिंदू पंचांग में अत्यंत पवित्र और शुभ मानी जाती है। यह चंद्र मास की बारहवीं तिथि होती है और विशेष रूप से भगवान विष्णु को समर्पित है।

एकादशी के बाद आने वाली द्वादशी को व्रत पूर्ण करने का दिन माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, दान और धार्मिक कार्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

द्वादशी का महत्व

शास्त्रों के अनुसार द्वादशी तिथि भगवान विष्णु की पूजा के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। द्वादशी व्रत का पालन करने से पापों का नाश होता है और आध्यात्मिक पुण्य प्राप्त होता है।

मान्यता है कि द्वादशी का व्रत मोक्ष प्राप्ति के मार्ग को प्रशस्त करता है।

शास्त्रों में द्वादशी का वर्णन

मनुस्मृति, पद्म पुराण, स्कंद पुराण और विष्णु धर्मोत्तर पुराण में द्वादशी तिथि के महत्व का विस्तृत वर्णन मिलता है।

इस दिन स्नान, दान, मंत्र जाप, हवन और उपवास करने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है।

द्वादशी और भगवान विष्णु के अवतार

पुराणों के अनुसार कई द्वादशी तिथियाँ भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों से जुड़ी हैं।

जैसे कूर्म द्वादशी कूर्म अवतार से, मत्स्य द्वादशी मत्स्य अवतार से और परशुराम द्वादशी भगवान परशुराम से संबंधित है।

द्वादशी कब आती है?

द्वादशी हिंदू पंचांग के बारहवें चंद्र दिवस पर आती है और आमतौर पर एकादशी के उपवास के बाद आती है।

द्वादशी पर किस देवता की पूजा की जाती है?

द्वादशी भगवान विष्णु को समर्पित है। भक्त विष्णु जी की पूजा करते हैं आशीर्वाद, समृद्धि और आध्यात्मिक विकास के लिए।