

हमारी गणना पद्धति
पंचांग क्या है?
पंचांग (संस्कृत: पञ्चाङ्ग, "पाँच अंग") एक पारंपरिक हिंदू पंचांग है जो ग्रह और चंद्रमा की स्थितियों से प्राप्त पाँच तत्वों के अनुसार प्रत्येक दिन की गुणवत्ता का वर्णन करता है। पाँच अंग — तिथि (चंद्र दिवस), नक्षत्र (चंद्र मंसिल), योग (सूर्य-चंद्र संयोग), करण (अर्ध तिथि), और वार (सप्ताह का दिन) — मिलकर त्योहारों, व्रतों और विवाह व गृह-प्रवेश जैसे महत्वपूर्ण जीवन-कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त निर्धारित करते हैं।
हमारी गणना पद्धति: दृक् गणित
शुभ पंचांग दृक् गणित (प्रेक्षण-आधारित) पद्धति का उपयोग करता है, जो आकाश में वास्तव में दिखने वाली खगोलीय पिंडों की वास्तविक स्थितियों से पंचांग तत्वों की गणना करती है। यह उन पुरानी वाक्य या सैद्धांतिक पद्धतियों के विपरीत है जो सदियों से संचित मध्यम-गति के अनुमानों का उपयोग करती हैं।
ग्रह स्थितियाँ
ग्रह देशान्तर की गणना स्विस एफेमेरिस — JPL एफेमेरिस डेटा पर आधारित एक उच्च-सटीक खगोलीय लाइब्रेरी — का उपयोग करके की जाती है। इन स्थितियों से पाँचों पंचांग अंगों की गणना की जाती है।
स्थान-आधारित सूर्योदय और सूर्यास्त
तिथि, नक्षत्र, योग और करण सभी स्थानीय सूर्योदय के सापेक्ष मापे जाते हैं। शुभ पंचांग उपयोगकर्ता के सटीक भौगोलिक निर्देशांकों के लिए सूर्योदय और सूर्यास्त की गणना करता है, जिससे राहु काल, चौघड़िया और अभिजित मुहूर्त सहित सभी पंचांग समय आपके शहर के लिए सटीक रहते हैं।
हमारा दृष्टिकोण एवं मानक
हमारी पंचांग गणनाएँ दृक् गणित (प्रेक्षण खगोल विज्ञान) का उपयोग करती हैं — वही पद्धति जो आधुनिक भारतीय पंचांगों और भारत सरकार के कैलेंडर में उपयोग होती है। सूर्य और चंद्र की ग्रह स्थितियाँ खगोलीय एल्गोरिदम से वास्तविक समय में गणित की जाती हैं, जिससे किसी भी तिथि और स्थान के लिए सटीक तिथि, नक्षत्र, योग और करण समय प्राप्त होते हैं।
हम सभी सायन गणनाओं के लिए लाहिरी अयनांश (चित्रपक्ष) का उपयोग करते हैं — भारत सरकार द्वारा 1955 में अपनाया गया आधिकारिक अयनांश।
त्योहार और व्रत तिथियाँ गुजरात और पूरे भारत में प्रचलित पारंपरिक विक्रम संवत् चंद्र पंचांग परंपराओं के अनुसार हैं।
प्रकाशक और सटीकता
शुभ पंचांग एक स्वतंत्र डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है जो सटीक, परंपरा-आधारित पंचांग डेटा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा डेटा प्रतिदिन अपडेट किया जाता है। हम उच्चतम सटीकता का प्रयास करते हैं, फिर भी महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान करने वाले उपयोगकर्ताओं को अपनी परंपरा और स्थान के लिए स्थानीय पंडित से पुष्टि करने की सलाह दी जाती है।



