श्रावण वद चतुर्थी - विक्रम संवत २०८३
शुभ (अच्छा): ०३:४८ PM - ०५:२२ PM
रोग (बुराई): ०५:२२ PM - ०६:५७ PM
वद नवमी
वृश्चिक
वद दशमी
धनु
वद एकादशी - विजया एकादशी
धनु
वद एकादशी - विजया एकादशी
धनु
वद द्वादशी
मकर
वद त्रयोदशी - महाशिवरात्रि
मकर
वद चतुर्दशी
कुंभ
वद अमावस
कुंभ
सुद प्रतिपदा - गुडी पडवा, उगादी, चेटीचंद
कुंभ
सुद द्वितीया
मीन
सुद तृतीया
मीन
सुद चतुर्थी
मेष
सुद पंचमी - आज दूसरा शनिवार होने के कारण बैंक बंद रहेगा।
मेष
सुद षष्ठी
वृषभ
सुद सप्तमी
वृषभ
सुद अष्टमी - होलाष्टक प्रारंभ
मिथुन
सुद दशमी
मिथुन
सुद एकादशी - आमलकी एकादशी
कर्क
सुद द्वादशी
कर्क
सुद त्रयोदशी
कर्क
सुद चतुर्दशी - होली
सिंह
सुद पूर्णिमा - धुलेटी, विश्व जल दिवस
सिंह
वद प्रतिपदा - पुष्पादोलोत्सव
कन्या
वद द्वितीया
कन्या
वद तृतीया
तुला
वद चतुर्थी
तुला
वद पंचमी - आज चौथा शनिवार होने के कारण बैंक बंद रहेगा।
वृश्चिक
वद षष्ठी
वृश्चिक
वद सप्तमी
वृश्चिक
वद अष्टमी
धनु
वद नवमी
धनु
इस महीने आने वाले त्यौहार और छुट्टियाँ
२१
मार्च, २०२७
रविवार
फागुन सुद चतुर्दशी
विक्रम संवत २०८३

सूर्योदय और सूर्यास्त
त्योहार और छुट्टियां
राशि
तिथि
नक्षत्र
योग
दैनिक पंचांग विवरण
इस महीने आने वाले त्यौहार और छुट्टियाँ
२१ मार्च २०२७ का पंचांग
२१ मार्च २०२७ को रविवार है। यह दिन फाल्गुन मास, शुक्ल पक्ष में आता है। आज की तिथि शुक्ल पक्ष चतुर्दशी है, जो ०६:२१ अपराह्न तक रहेगी; इसके बाद शुक्ल पक्ष पूर्णिमा प्रारंभ होगी। इस दिन का नक्षत्र पूर्व फाल्गुनी है, जो १०:०६ अपराह्न के बाद उत्तर फाल्गुनी में बदलेगा। राहु काल ०५:२० PM से ०६:५० PM तक रहेगा।
| वार | रविवार |
|---|---|
| माह | मार्च २०२७ |
| तिथि | चतुर्दशी (०६:२१ अपराह्न तक; फिर पूर्णिमा) |
| नक्षत्र | पूर्व फाल्गुनी (१०:०६ अपराह्न तक; फिर उत्तर फाल्गुनी) |
| योग | शूल (०४:५७ अपराह्न तक; फिर गण्ड) |
| करण | शकुनि (०६:२१ अपराह्न तक; फिर चतुष्पद) |
| पक्ष | शुक्ल |
| मास | फाल्गुन |
| राहु काल | ०५:२० PM – ०६:५० PM |
| गुलिक काल | ०३:४९ PM – ०५:२० PM |
| यमगण्ड काल | १२:४७ PM – ०२:१८ PM |
| अभिजीत मुहूर्त | १२:२३ PM – ०१:११ PM |
| ब्रह्म मुहूर्त | ०५:०७ AM – ०५:५५ AM |
| सूर्योदय | ०६:४३ AM |
| सूर्यास्त | ०६:५० PM |
| चंद्र राशि | सिंह (१२:०० पूर्वाह्न तक) |
| शुभ रंग | लाल |
| विक्रम संवत | २०८३ |
| शक संवत | १९४८ |
२१ मार्च २०२७ को क्या है?
२१ मार्च २०२७ को रविवार है। इस दिन का नक्षत्र पूर्व फाल्गुनी, योग शूल, चंद्र राशि सिंह है। इस दिन होली का पर्व है।
२१ मार्च २०२७ को कौन-सी तिथि है?
२१ मार्च २०२७ को शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि है। यह तिथि ०६:२१ अपराह्न तक रहेगी। इसके बाद शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि प्रारंभ होगी। आज की सटीक तिथि और उसका समय जानने के लिए आज की तिथि पेज देखें।
२१ मार्च २०२७ का नक्षत्र क्या है?
२१ मार्च २०२७ का नक्षत्र पूर्व फाल्गुनी है। १०:०६ अपराह्न के बाद उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र प्रारंभ होगा। नक्षत्र चंद्रमा की आकाशीय स्थिति को दर्शाता है और पूजा, विवाह एवं यात्रा के मुहूर्त में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
२१ मार्च २०२७ का राहु काल क्या है?
२१ मार्च २०२७ का राहु काल ०५:२० PM से ०६:५० PM तक है। राहु काल में शुभ कार्य, यात्रा और नए उपक्रम आरंभ करने से बचना चाहिए। शुभ चौघड़िया देखने के लिए चौघड़िया पृष्ठ देखें।
२१ मार्च २०२७ का शुभ मुहूर्त क्या है?
२१ मार्च २०२७ का अभिजीत मुहूर्त १२:२३ PM से ०१:११ PM तक है — यह दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ काल माना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त ०५:०७ AM से ०५:५५ AM तक है, जो ध्यान, पूजा और सकारात्मक कार्यों के लिए उत्तम है। विस्तृत मुहूर्त सूची के लिए शुभ मुहूर्त पृष्ठ देखें।
२१ मार्च २०२७ के शुभ और अशुभ समय
शुभ समय: अभिजीत मुहूर्त (१२:२३ PM – ०१:११ PM), ब्रह्म मुहूर्त (०५:०७ AM – ०५:५५ AM), शुभ रंग लाल।
अशुभ समय: राहु काल (०५:२० PM – ०६:५० PM), गुलिक काल (०३:४९ PM – ०५:२० PM), यमगण्ड काल (१२:४७ PM – ०२:१८ PM)।
क्या २१ मार्च २०२७ का पंचांग शहर के अनुसार बदलता है?
हाँ, २१ मार्च २०२७ का पंचांग शहर के अनुसार बदल सकता है। पंचांग की गणना सूर्योदय, सूर्यास्त और ग्रहों की स्थिति पर आधारित होती है, जो हर स्थान पर अलग होती है। शुभ पंचांग चयनित शहर के अनुसार सटीक पंचांग प्रदान करता है।
२१ मार्च २०२७ का पंचांग कैसे गणना किया जाता है?
पंचांग की गणना दृक गणित पद्धति पर आधारित है, जो सूर्योदय, सूर्यास्त और ग्रहों की वास्तविक खगोलीय स्थितियों का उपयोग करती है। तिथि चंद्रमा और सूर्य के कोणीय अंतर से, नक्षत्र चंद्र की राशि स्थिति से, और योग दोनों ग्रहों की संयुक्त गति से निर्धारित होता है।
पंचांग क्या है और इसका महत्व क्या है?
पंचांग वैदिक समय गणना प्रणाली है, जो तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार के आधार पर दिन की शुभता और अशुभता को दर्शाती है। इसका उपयोग पूजा, व्रत, मुहूर्त, यात्रा और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए किया जाता है।
पंचांग क्या है, इसे कैसे पढ़ें और इसका महत्व विस्तार से समझने के लिए यहाँ पढ़ें।





