श्रावण वद चतुर्थी - विक्रम संवत २०८३
काल (नुकसान): ०२:१४ PM - ०३:४८ PM
शुभ (अच्छा): ०३:४८ PM - ०५:२२ PM
वद चतुर्थी - नाग पंचम
मीन
वद षष्ठी - रांधन छठ
मेष
वद सप्तमी - शीतला सप्तमी
मेष
वद अष्टमी - श्री कृष्ण जन्माष्टमी
वृषभ
वद नवमी - नंद महोत्सव, राष्ट्रीय शिक्षक दिवस
वृषभ
वद दशमी
मिथुन
वद एकादशी - अजा एकादशी
मिथुन
वद द्वादशी
कर्क
वद त्रयोदशी
कर्क
वद चतुर्दशी - पिठोरी अमावस्या
सिंह
वद अमावस
सिंह
सुद प्रतिपदा - सामा-श्रावणी, आज दूसरा शनिवार होने के कारण बैंक बंद रहेगा।
कन्या
सुद द्वितीया
कन्या
सुद तृतीया - केवड़ा तीज, गणेश चतुर्थी
कन्या
सुद चतुर्थी - संवत्सरी, ऋषि पाँचम, सामा पाँचम
तुला
सुद पंचमी
तुला
सुद षष्ठी - विश्वकर्मा जयंती
वृश्चिक
सुद सप्तमी
वृश्चिक
सुद अष्टमी
धनु
सुद नवमी
धनु
सुद दशमी - तेजा दशमी
धनु
सुद एकादशी - जल झिलनी एकादशी
मकर
सुद द्वादशी - वामन जयंती
मकर
सुद त्रयोदशी
कुंभ
सुद चतुर्दशी - गणेश विसर्जन
कुंभ
सुद पूर्णिमा - प्रोष्ठपदी पूर्णिमा, आज चौथा शनिवार होने के कारण बैंक बंद रहेगा।
कुंभ
वद प्रतिपदा - प्रतिपदा श्राद्ध
मीन
वद द्वितीया - द्वितीया श्राद्ध
मीन
वद तृतीया - तृतीया श्राद्ध
मेष
वद चतुर्थी - चतुर्थी श्राद्ध, पंचमी श्राद्ध
मेष
इस महीने आने वाले त्यौहार और छुट्टियाँ
२१
सितंबर, २०२६
सोमवार
भाद्रपद सुद दशमी
विक्रम संवत २०८३

सूर्योदय और सूर्यास्त
त्योहार और छुट्टियां
राशि
तिथि
नक्षत्र
योग
दैनिक पंचांग विवरण
इस महीने आने वाले त्यौहार और छुट्टियाँ
२१ सितंबर २०२६ का पंचांग
२१ सितंबर २०२६ को सोमवार है। यह दिन भाद्रपद मास, शुक्ल पक्ष में आता है। आज की तिथि शुक्ल पक्ष दशमी है, जो ०८:०० अपराह्न तक रहेगी; इसके बाद शुक्ल पक्ष एकादशी प्रारंभ होगी। इस दिन का नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा है, जो ०४:३४ पूर्वाह्न के बाद उत्तराषाढ़ा में बदलेगा। राहु काल ०७:५९ AM से ०९:३० AM तक रहेगा।
| वार | सोमवार |
|---|---|
| माह | सितंबर २०२६ |
| तिथि | दशमी (०८:०० अपराह्न तक; फिर एकादशी) |
| नक्षत्र | पूर्वाषाढ़ा (०४:३४ पूर्वाह्न तक; फिर उत्तराषाढ़ा) |
| योग | शोभना (०४:०४ अपराह्न तक; फिर अतिगण्ड) |
| करण | गारा (०८:०० अपराह्न तक; फिर वाणिज) |
| पक्ष | शुक्ल |
| मास | भाद्रपद |
| राहु काल | ०७:५९ AM – ०९:३० AM |
| गुलिक काल | ०२:०४ PM – ०३:३५ PM |
| यमगण्ड काल | ११:०२ AM – १२:३३ PM |
| अभिजीत मुहूर्त | १२:०८ PM – १२:५७ PM |
| ब्रह्म मुहूर्त | ०४:५२ AM – ०५:४० AM |
| सूर्योदय | ०६:२८ AM |
| सूर्यास्त | ०६:३८ PM |
| चंद्र राशि | धनु (११:१४ पूर्वाह्न तक; फिर मकर) |
| शुभ रंग | सफ़ेद |
| विक्रम संवत | २०८३ |
| शक संवत | १९४८ |
२१ सितंबर २०२६ को क्या है?
२१ सितंबर २०२६ को सोमवार है। इस दिन का नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा, योग शोभना, चंद्र राशि धनु है। इस दिन तेजा दशमी का पर्व है।
२१ सितंबर २०२६ को कौन-सी तिथि है?
२१ सितंबर २०२६ को शुक्ल पक्ष दशमी तिथि है। यह तिथि ०८:०० अपराह्न तक रहेगी। इसके बाद शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि प्रारंभ होगी। आज की सटीक तिथि और उसका समय जानने के लिए आज की तिथि पेज देखें।
२१ सितंबर २०२६ का नक्षत्र क्या है?
२१ सितंबर २०२६ का नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा है। ०४:३४ पूर्वाह्न के बाद उत्तराषाढ़ा नक्षत्र प्रारंभ होगा। नक्षत्र चंद्रमा की आकाशीय स्थिति को दर्शाता है और पूजा, विवाह एवं यात्रा के मुहूर्त में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
२१ सितंबर २०२६ का राहु काल क्या है?
२१ सितंबर २०२६ का राहु काल ०७:५९ AM से ०९:३० AM तक है। राहु काल में शुभ कार्य, यात्रा और नए उपक्रम आरंभ करने से बचना चाहिए। शुभ चौघड़िया देखने के लिए चौघड़िया पृष्ठ देखें।
२१ सितंबर २०२६ का शुभ मुहूर्त क्या है?
२१ सितंबर २०२६ का अभिजीत मुहूर्त १२:०८ PM से १२:५७ PM तक है — यह दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ काल माना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त ०४:५२ AM से ०५:४० AM तक है, जो ध्यान, पूजा और सकारात्मक कार्यों के लिए उत्तम है। विस्तृत मुहूर्त सूची के लिए शुभ मुहूर्त पृष्ठ देखें।
२१ सितंबर २०२६ के शुभ और अशुभ समय
शुभ समय: अभिजीत मुहूर्त (१२:०८ PM – १२:५७ PM), ब्रह्म मुहूर्त (०४:५२ AM – ०५:४० AM), शुभ रंग सफ़ेद।
अशुभ समय: राहु काल (०७:५९ AM – ०९:३० AM), गुलिक काल (०२:०४ PM – ०३:३५ PM), यमगण्ड काल (११:०२ AM – १२:३३ PM)।
क्या २१ सितंबर २०२६ का पंचांग शहर के अनुसार बदलता है?
हाँ, २१ सितंबर २०२६ का पंचांग शहर के अनुसार बदल सकता है। पंचांग की गणना सूर्योदय, सूर्यास्त और ग्रहों की स्थिति पर आधारित होती है, जो हर स्थान पर अलग होती है। शुभ पंचांग चयनित शहर के अनुसार सटीक पंचांग प्रदान करता है।
२१ सितंबर २०२६ का पंचांग कैसे गणना किया जाता है?
पंचांग की गणना दृक गणित पद्धति पर आधारित है, जो सूर्योदय, सूर्यास्त और ग्रहों की वास्तविक खगोलीय स्थितियों का उपयोग करती है। तिथि चंद्रमा और सूर्य के कोणीय अंतर से, नक्षत्र चंद्र की राशि स्थिति से, और योग दोनों ग्रहों की संयुक्त गति से निर्धारित होता है।
पंचांग क्या है और इसका महत्व क्या है?
पंचांग वैदिक समय गणना प्रणाली है, जो तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार के आधार पर दिन की शुभता और अशुभता को दर्शाती है। इसका उपयोग पूजा, व्रत, मुहूर्त, यात्रा और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए किया जाता है।
पंचांग क्या है, इसे कैसे पढ़ें और इसका महत्व विस्तार से समझने के लिए यहाँ पढ़ें।





