शुभ पंचांग लोगो
सितंबर , २०२६ मंगलवार
ToranToran

२०२६ का विंछुड़ो

अवधि
२ दिन १२ घंटे
प्रारंभ
जनवरी १३, २०२६
०५:२१ अपराह्न
मंगलवार
समाप्त
जनवरी १६, २०२६
०५:४७ पूर्वाह्न
शुक्रवार
अवधि
२ दिन १३ घंटे
प्रारंभ
फ़रवरी १०, २०२६
०१:११ पूर्वाह्न
मंगलवार
समाप्त
फ़रवरी १२, २०२६
०१:४२ अपराह्न
गुरुवार
अवधि
२ दिन १२ घंटे
प्रारंभ
मार्च ०९, २०२६
०९:२९ पूर्वाह्न
सोमवार
समाप्त
मार्च ११, २०२६
१०:०० अपराह्न
बुधवार
अवधि
२ दिन १२ घंटे
प्रारंभ
अप्रैल ०५, २०२६
०५:२७ अपराह्न
रविवार
समाप्त
अप्रैल ०८, २०२६
०५:५३ पूर्वाह्न
बुधवार
अवधि
२ दिन १२ घंटे
प्रारंभ
मई ०३, २०२६
१२:२९ पूर्वाह्न
रविवार
समाप्त
मई ०५, २०२६
१२:५४ अपराह्न
मंगलवार
अवधि
२ दिन १२ घंटे
प्रारंभ
मई ३०, २०२६
०६:३८ पूर्वाह्न
शनिवार
समाप्त
जून ०१, २०२६
०७:०८ अपराह्न
सोमवार
अवधि
२ दिन १३ घंटे
प्रारंभ
जून २६, २०२६
१२:३३ अपराह्न
शुक्रवार
समाप्त
जून २९, २०२६
०१:०८ पूर्वाह्न
सोमवार
अवधि
२ दिन १३ घंटे
प्रारंभ
जुलाई २३, २०२६
०७:०१ अपराह्न
गुरुवार
समाप्त
जुलाई २६, २०२६
०७:३४ पूर्वाह्न
रविवार
अवधि
२ दिन १२ घंटे
प्रारंभ
अगस्त २०, २०२६
०२:३० पूर्वाह्न
गुरुवार
समाप्त
अगस्त २२, २०२६
०२:४९ अपराह्न
शनिवार
अवधि
२ दिन १२ घंटे
प्रारंभ
सितंबर १६, २०२६
१०:४९ पूर्वाह्न
बुधवार
समाप्त
सितंबर १८, २०२६
१०:४४ अपराह्न
शुक्रवार
अवधि
२ दिन १२ घंटे
प्रारंभ
अक्टूबर १३, २०२६
०७:१२ अपराह्न
मंगलवार
समाप्त
अक्टूबर १६, २०२६
०६:४७ पूर्वाह्न
शुक्रवार
अवधि
२ दिन ११ घंटे
प्रारंभ
नवंबर १०, २०२६
०२:४८ पूर्वाह्न
मंगलवार
समाप्त
नवंबर १२, २०२६
०२:१९ अपराह्न
गुरुवार
अवधि
२ दिन १२ घंटे
प्रारंभ
दिसंबर ०७, २०२६
०९:१३ पूर्वाह्न
सोमवार
समाप्त
दिसंबर ०९, २०२६
०९:०० अपराह्न
बुधवार

विंछुडो २०२६ की तिथि – जब चंद्रमा वृश्चिक राशि में प्रवेश करता है

विंछुडो एक पारंपरिक चंद्र आधारित समय है जो मुख्य रूप से गुजरात में माना जाता है। यह तब प्रारंभ होता है जब चंद्रमा निरयन पद्धति के अनुसार वृश्चिक राशि में प्रवेश करता है।

वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा मन और भावनाओं का कारक है। वृश्चिक राशि में चंद्रमा नीच का माना जाता है, इसलिए इस गोचर को संवेदनशील समय माना जाता है।

खगोलीय आधार

जब चंद्रमा २१०° निरयन राशि पर पहुँचता है, तब वह वृश्चिक राशि में प्रवेश करता है। उसी क्षण से विंछुडो प्रारंभ माना जाता है। इसकी गणना पंचांग और खगोलीय गणना से की जाती है।

ज्योतिषीय महत्व

वृश्चिक में चंद्रमा भावनात्मक तीव्रता दर्शाता है। इस समय मानसिक अस्थिरता या जल्दबाजी के निर्णय हो सकते हैं। परंतु प्रभाव व्यक्तिगत जन्म कुंडली पर निर्भर करता है।

क्या विंछुडो पंचक है?

नहीं, विंछुडो और पंचक दोनों अलग ज्योतिषीय अवधारणाएँ हैं। विंछुडो तब माना जाता है जब चंद्रमा वृश्चिक राशि में प्रवेश करता है, जबकि पंचक तब बनता है जब चंद्रमा अंतिम पाँच नक्षत्रों (धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती) में गोचर करता है। कभी-कभी दोनों समय एक साथ आ सकते हैं, लेकिन ज्योतिष में इनकी गणना अलग-अलग होती है।

विंछुडो कब शुरू होता है?

विंछुडो उस समय शुरू माना जाता है जब चंद्रमा वृश्चिक राशि में प्रवेश करता है। चंद्रमा के इस गोचर को कई पंचांगों विशेष सावधानी वाले समय के रूप में बताया जाता है।

यह कब समाप्त होता है?

विंछुडो तब समाप्त होता है जब चंद्रमा वृश्चिक राशि से निकलकर धनु राशि में प्रवेश करता है। इसके बाद यह अवधि समाप्त मानी जाती है।

क्या यह सभी पर समान प्रभाव डालता है?

नहीं, विंछुडो का प्रभाव हर व्यक्ति पर समान नहीं होता। ज्योतिष के अनुसार इसका असर व्यक्ति की जन्म कुंडली, ग्रह स्थिति और दशा पर निर्भर करता है। इसलिए इसका प्रभाव अलग-अलग लोगों के लिए अलग हो सकता है।

क्या यह वैज्ञानिक रूप से देखा जा सकता है?

खगोलीय दृष्टि से विंछुडो चंद्रमा की राशि स्थिति पर आधारित है। जब चंद्रमा वृश्चिक राशि में होता है तब यह अवधि बनती है। हालाँकि इसके प्रभाव की व्याख्या पारंपरिक वैदिक ज्योतिष सिद्धांतों के आधार पर की जाती है।