शुभ पंचांग लोगो
सितंबर , २०२६ मंगलवार
ToranToran

२०२६ की मासिक कालाष्टमी तिथियां

पौष
वद अष्टमी
१ दिन २ घंटे
प्रारंभ
जनवरी १०, २०२६
०८:२३ पूर्वाह्न
शनिवार
समाप्त
जनवरी ११, २०२६
१०:२० पूर्वाह्न
रविवार
माघ
वद अष्टमी
१ दिन २ घंटे
प्रारंभ
फ़रवरी ०९, २०२६
०५:०१ पूर्वाह्न
सोमवार
समाप्त
फ़रवरी १०, २०२६
०७:२७ पूर्वाह्न
मंगलवार
फाल्गुन
वद अष्टमी
१ दिन २ घंटे
प्रारंभ
मार्च ११, २०२६
०१:५४ पूर्वाह्न
बुधवार
समाप्त
मार्च १२, २०२६
०४:१९ पूर्वाह्न
गुरुवार
चैत्र
वद अष्टमी
१ दिन २ घंटे
प्रारंभ
अप्रैल ०९, २०२६
०९:१९ अपराह्न
गुरुवार
समाप्त
अप्रैल १०, २०२६
११:१५ अपराह्न
शुक्रवार
वैशाख
वद अष्टमी
१ दिन १ घंटा
प्रारंभ
मई ०९, २०२६
०२:०३ अपराह्न
शनिवार
समाप्त
मई १०, २०२६
०३:०६ अपराह्न
रविवार
अधिक ज्येष्ठ
वद अष्टमी
२३ घंटे ५९ मिनट
प्रारंभ
जून ०८, २०२६
०३:२४ पूर्वाह्न
सोमवार
समाप्त
जून ०९, २०२६
०३:२३ पूर्वाह्न
मंगलवार
ज्येष्ठ
वद अष्टमी
२२ घंटे ५६ मिनट
प्रारंभ
जुलाई ०७, २०२६
०१:२५ अपराह्न
मंगलवार
समाप्त
जुलाई ०८, २०२६
१२:२१ अपराह्न
बुधवार
आषाढ़
वद अष्टमी
२२ घंटे १० मिनट
प्रारंभ
अगस्त ०५, २०२६
०८:४२ अपराह्न
बुधवार
समाप्त
अगस्त ०६, २०२६
०६:५२ अपराह्न
गुरुवार
श्रावण
वद अष्टमी
२१ घंटे ४८ मिनट
प्रारंभ
सितंबर ०४, २०२६
०२:२५ पूर्वाह्न
शुक्रवार
समाप्त
सितंबर ०५, २०२६
१२:१३ पूर्वाह्न
शनिवार
भाद्रपद
वद अष्टमी
२१ घंटे ५२ मिनट
प्रारंभ
अक्टूबर ०३, २०२६
०७:५९ पूर्वाह्न
शनिवार
समाप्त
अक्टूबर ०४, २०२६
०५:५१ पूर्वाह्न
रविवार
आश्विन
वद अष्टमी
२२ घंटे १८ मिनट
प्रारंभ
नवंबर ०१, २०२६
०२:५१ अपराह्न
रविवार
समाप्त
नवंबर ०२, २०२६
०१:१० अपराह्न
सोमवार
कार्तिक
वद अष्टमी
२३ घंटे ४८ मिनट
प्रारंभ
दिसंबर ०१, २०२६
१२:११ पूर्वाह्न
मंगलवार
समाप्त
दिसंबर ०१, २०२६
११:५९ अपराह्न
मंगलवार
मार्गशीर्ष
वद अष्टमी
२३ घंटे ५६ मिनट
प्रारंभ
दिसंबर ३०, २०२६
१२:३६ अपराह्न
बुधवार
समाप्त
दिसंबर ३१, २०२६
१२:३२ अपराह्न
गुरुवार

मासिक कालाष्टमी २०२६ – भगवान कालभैरव की मासिक पूजा

मासिक कालाष्टमी भगवान कालभैरव को समर्पित एक पवित्र व्रत और पूजा का दिन है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कालाष्टमी मनाई जाती है। इस दिन भगवान भैरव के भक्त व्रत रखते हैं और उनकी पूजा करते हैं।

“मासिक” का अर्थ है हर महीने आने वाला। इसलिए मासिक कालाष्टमी हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आती है। यह दिन भय, बाधाओं और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

मासिक कालाष्टमी का महत्व

इस दिन भक्त भगवान कालभैरव की पूजा करते हैं, भैरव मंत्रों का जाप करते हैं और भैरव मंदिरों में दर्शन करते हैं। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से भय और संकट दूर होते हैं।

कालभैरव जयंती

कालाष्टमी का सबसे महत्वपूर्ण दिन कालभैरव जयंती के रूप में जाना जाता है। उत्तर भारतीय पंचांग के अनुसार यह मार्गशीर्ष मास में आती है, जबकि दक्षिण भारतीय पंचांग में यह कार्तिक मास में मानी जाती है। दोनों पंचांगों में यह एक ही दिन मनाई जाती है।

मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने कालभैरव रूप में प्रकट होकर भक्तों की रक्षा की। कालभैरव जयंती को भैरव अष्टमी भी कहा जाता है।

कालाष्टमी व्रत नियम

धार्मिक ग्रंथ व्रतराज के अनुसार कालाष्टमी का व्रत उस दिन रखा जाता है जब अष्टमी तिथि रात में पड़ती हो। इसलिए कभी-कभी व्रत सप्तमी तिथि को भी रखा जाता है यदि अष्टमी रात में आरंभ हो।

पंचांग गणना में यह सुनिश्चित किया जाता है कि अष्टमी तिथि प्रदोष के बाद कम से कम एक घटी तक बनी रहे।

मासिक कालाष्टमी कब आती है?

यह हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आती है।

कालाष्टमी पर किसकी पूजा की जाती है?

इस दिन भगवान कालभैरव की पूजा की जाती है।

सबसे महत्वपूर्ण कालाष्टमी कौन सी है?

कालभैरव जयंती को सबसे महत्वपूर्ण कालाष्टमी माना जाता है।