शुभ पंचांग लोगो
सितंबर , २०२६ मंगलवार
ToranToran

२०२६ की गणेश चतुर्थी तिथियां

माघ
सुद चतुर्थी
२३ घंटे ४१ मिनट
प्रारंभ
जनवरी २२, २०२६
०२:४७ पूर्वाह्न
गुरुवार
समाप्त
जनवरी २३, २०२६
०२:२८ पूर्वाह्न
शुक्रवार
पूजा मुहूर्त
जनवरी २२, २०२६११:४४ पूर्वाह्न०१:५७ अपराह्न
२ घंटे १२ मिनट
फाल्गुन
सुद चतुर्थी
२२ घंटे २२ मिनट
प्रारंभ
फ़रवरी २०, २०२६
०२:३८ अपराह्न
शुक्रवार
समाप्त
फ़रवरी २१, २०२६
०१:०० अपराह्न
शनिवार
पूजा मुहूर्त
फ़रवरी २१, २०२६११:४४ पूर्वाह्न०१:०० अपराह्न
१ घंटा १६ मिनट
चैत्र
सुद चतुर्थी
२१ घंटे १६ मिनट
प्रारंभ
मार्च २२, २०२६
१२:०० पूर्वाह्न
रविवार
समाप्त
मार्च २२, २०२६
०९:१६ अपराह्न
रविवार
पूजा मुहूर्त
मार्च २२, २०२६११:३४ पूर्वाह्न०१:५९ अपराह्न
२ घंटे २५ मिनट
वैशाख
सुद चतुर्थी
२० घंटे ४७ मिनट
प्रारंभ
अप्रैल २०, २०२६
०७:२७ पूर्वाह्न
सोमवार
समाप्त
अप्रैल २१, २०२६
०४:१५ पूर्वाह्न
मंगलवार
पूजा मुहूर्त
अप्रैल २०, २०२६११:२२ पूर्वाह्न०१:५५ अपराह्न
२ घंटे ३२ मिनट
अधिक ज्येष्ठ
सुद चतुर्थी
२० घंटे ४८ मिनट
प्रारंभ
मई १९, २०२६
०२:१८ अपराह्न
मंगलवार
समाप्त
मई २०, २०२६
११:०७ पूर्वाह्न
बुधवार
पूजा मुहूर्त
मई २०, २०२६११:१७ पूर्वाह्न०१:५५ अपराह्न
२ घंटे ३८ मिनट
ज्येष्ठ
सुद चतुर्थी
१८ घंटे ५९ मिनट
प्रारंभ
जून १८, २०२६
१२:०० पूर्वाह्न
गुरुवार
समाप्त
जून १८, २०२६
०६:५९ अपराह्न
गुरुवार
पूजा मुहूर्त
जून १८, २०२६११:२० पूर्वाह्न०२:०१ अपराह्न
२ घंटे ४१ मिनट
आषाढ़
सुद चतुर्थी
२२ घंटे १४ मिनट
प्रारंभ
जुलाई १७, २०२६
०६:२८ पूर्वाह्न
शुक्रवार
समाप्त
जुलाई १८, २०२६
०४:४२ पूर्वाह्न
शनिवार
पूजा मुहूर्त
जुलाई १७, २०२६११:२६ पूर्वाह्न०२:०५ अपराह्न
२ घंटे ३९ मिनट
श्रावण
सुद चतुर्थी
२३ घंटे २३ मिनट
प्रारंभ
अगस्त १५, २०२६
०५:२९ अपराह्न
शनिवार
समाप्त
अगस्त १६, २०२६
०४:५२ अपराह्न
रविवार
पूजा मुहूर्त
अगस्त १६, २०२६११:२७ पूर्वाह्न०२:०१ अपराह्न
२ घंटे ३४ मिनट
भाद्रपद
सुद चतुर्थी
१ दिन १ घंटा
प्रारंभ
सितंबर १४, २०२६
०७:०६ पूर्वाह्न
सोमवार
समाप्त
सितंबर १५, २०२६
०७:४४ पूर्वाह्न
मंगलवार
पूजा मुहूर्त
सितंबर १४, २०२६११:२२ पूर्वाह्न०१:४९ अपराह्न
२ घंटे २७ मिनट
आश्विन
सुद चतुर्थी
१ दिन २ घंटे
प्रारंभ
अक्टूबर १३, २०२६
११:२७ अपराह्न
मंगलवार
समाप्त
अक्टूबर १५, २०२६
०१:१३ पूर्वाह्न
गुरुवार
पूजा मुहूर्त
अक्टूबर १४, २०२६११:१५ पूर्वाह्न०१:३६ अपराह्न
२ घंटे २० मिनट
कार्तिक
सुद चतुर्थी
१ दिन ३ घंटे
प्रारंभ
नवंबर १२, २०२६
०६:०९ अपराह्न
गुरुवार
समाप्त
नवंबर १३, २०२६
०८:४२ अपराह्न
शुक्रवार
पूजा मुहूर्त
नवंबर १३, २०२६११:१७ पूर्वाह्न०१:३१ अपराह्न
२ घंटे १४ मिनट
मार्गशीर्ष
सुद चतुर्थी
१ दिन ३ घंटे
प्रारंभ
दिसंबर १२, २०२६
०२:०६ अपराह्न
शनिवार
समाप्त
दिसंबर १३, २०२६
०४:४७ अपराह्न
रविवार
पूजा मुहूर्त
दिसंबर १३, २०२६११:२८ पूर्वाह्न०१:३९ अपराह्न
२ घंटे १० मिनट

गणेश चतुर्थी २०२६ – भगवान गणेश का जन्मोत्सव

गणेश चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक प्रमुख हिंदू त्योहार है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और ज्ञान के देवता के रूप में पूजा जाता है। यह त्योहार भगवान गणेश के जन्म के उपलक्ष्य में दुनिया भर के हिंदुओं द्वारा बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक महीने में दो चतुर्थी तिथियाँ होती हैं। शास्त्रों के अनुसार चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित होती है और उनकी पूजा के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।

विनायक चतुर्थी और संकष्टी चतुर्थी

अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष में आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। पूर्णिमा के बाद कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है।

इन दिनों भक्त उपवास रखते हैं और भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष पूजा-अनुकूलन करते हैं।

भाद्रपद मास की गणेश चतुर्थी

यद्यपि विनायक चतुर्थी हर महीने आती है, लेकिन भाद्रपद महीने की विनायक चतुर्थी सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।

भाद्रपद मास की इस विनायक चतुर्थी को गणेश चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश का जन्मोत्सव भव्य अनुष्ठानों और उत्सवों के साथ मनाया जाता है।

वरद विनायक चतुर्थी

विनायक चतुर्थी को वरद विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है। "वरद" का अर्थ है भगवान से अपनी इच्छाएँ पूर्ण करने का आशीर्वाद माँगना।

भगवान गणेश इस व्रत को रखने वाले भक्तों को बुद्धि और धैर्य का आशीर्वाद देते हैं। ये गुण व्यक्ति को जीवन में प्रगति करने और कठिनाइयों को दूर करने में मदद करते हैं।

गणेश पूजा विधि

इस दिन भक्त घरों और मंदिरों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करते हैं और विशेष पूजा, आरती और भोग अर्पित करते हैं।

हिंदू परंपरा के अनुसार विनायक चतुर्थी के दिन गणेश पूजा दोपहर के समय (मध्याह्न) करना शुभ माना जाता है।

गणेश चतुर्थी कब मनाई जाती है?

गणेश चतुर्थी भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है।

गणेश चतुर्थी क्यों महत्वपूर्ण है?

गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्मोत्सव का प्रतीक है और बुद्धि, समृद्धि और सफलता पाने के लिए इसे अत्यंत शुभ माना जाता है।