शुभ पंचांग लोगो
सितंबर , २०२६ मंगलवार
ToranToran

२०२६ का अमृत सिद्धि योग

अवधि
१९ घंटे ४४ मिनट
प्रारंभ
जनवरी १४, २०२६
०७:१९ पूर्वाह्न
बुधवार
समाप्त
जनवरी १५, २०२६
०३:०३ पूर्वाह्न
गुरुवार
अवधि
३ घंटे ३९ मिनट
प्रारंभ
फ़रवरी ११, २०२६
०७:१२ पूर्वाह्न
बुधवार
समाप्त
फ़रवरी ११, २०२६
१०:५२ पूर्वाह्न
बुधवार
अवधि
११ घंटे ० मिनट
प्रारंभ
फ़रवरी २०, २०२६
०८:०७ अपराह्न
शुक्रवार
समाप्त
फ़रवरी २१, २०२६
०७:०७ पूर्वाह्न
शनिवार
अवधि
१९ घंटे ४३ मिनट
प्रारंभ
मार्च २०, २०२६
०६:४४ पूर्वाह्न
शुक्रवार
समाप्त
मार्च २१, २०२६
०२:२७ पूर्वाह्न
शनिवार
अवधि
५ घंटे ४२ मिनट
प्रारंभ
अप्रैल १७, २०२६
०६:१९ पूर्वाह्न
शुक्रवार
समाप्त
अप्रैल १७, २०२६
१२:०२ अपराह्न
शुक्रवार
अवधि
९ घंटे १७ मिनट
प्रारंभ
अप्रैल २३, २०२६
०८:५७ अपराह्न
गुरुवार
समाप्त
अप्रैल २४, २०२६
०६:१४ पूर्वाह्न
शुक्रवार
अवधि
१८ घंटे २९ मिनट
प्रारंभ
मई १८, २०२६
११:३१ पूर्वाह्न
सोमवार
समाप्त
मई १९, २०२६
०६:०१ पूर्वाह्न
मंगलवार
अवधि
२० घंटे ४९ मिनट
प्रारंभ
मई २१, २०२६
०६:०० पूर्वाह्न
गुरुवार
समाप्त
मई २२, २०२६
०२:४९ पूर्वाह्न
शुक्रवार
अवधि
१३ घंटे १० मिनट
प्रारंभ
जून १५, २०२६
०५:५८ पूर्वाह्न
सोमवार
समाप्त
जून १५, २०२६
०७:०८ अपराह्न
सोमवार
अवधि
५ घंटे ३३ मिनट
प्रारंभ
जून १८, २०२६
०५:५८ पूर्वाह्न
गुरुवार
समाप्त
जून १८, २०२६
११:३२ पूर्वाह्न
गुरुवार
अवधि
१९ घंटे १ मिनट
प्रारंभ
जुलाई ११, २०२६
११:०३ पूर्वाह्न
शनिवार
समाप्त
जुलाई १२, २०२६
०६:०४ पूर्वाह्न
रविवार
अवधि
११ घंटे ५६ मिनट
प्रारंभ
जुलाई १९, २०२६
०६:१२ अपराह्न
रविवार
समाप्त
जुलाई २०, २०२६
०६:०८ पूर्वाह्न
सोमवार
अवधि
८ घंटे २० मिनट
प्रारंभ
अगस्त ०४, २०२६
०९:५४ अपराह्न
मंगलवार
समाप्त
अगस्त ०५, २०२६
०६:१४ पूर्वाह्न
बुधवार
अवधि
१० घंटे ३५ मिनट
प्रारंभ
अगस्त ०८, २०२६
०६:१६ पूर्वाह्न
शनिवार
समाप्त
अगस्त ०८, २०२६
०४:५१ अपराह्न
शनिवार
अवधि
२१ घंटे ३१ मिनट
प्रारंभ
अगस्त १६, २०२६
०६:१८ पूर्वाह्न
रविवार
समाप्त
अगस्त १७, २०२६
०३:५० पूर्वाह्न
सोमवार
अवधि
२० घंटे १८ मिनट
वर्तमान
प्रारंभ
सितंबर ०१, २०२६
०६:२३ पूर्वाह्न
मंगलवार
समाप्त
सितंबर ०२, २०२६
०२:४२ पूर्वाह्न
बुधवार
अवधि
६ घंटे ४० मिनट
प्रारंभ
सितंबर १३, २०२६
०६:२६ पूर्वाह्न
रविवार
समाप्त
सितंबर १३, २०२६
०१:०६ अपराह्न
रविवार
अवधि
१३ घंटे ४ मिनट
प्रारंभ
सितंबर १६, २०२६
०५:२२ अपराह्न
बुधवार
समाप्त
सितंबर १७, २०२६
०६:२७ पूर्वाह्न
गुरुवार
अवधि
२ घंटे ३३ मिनट
प्रारंभ
सितंबर २९, २०२६
०६:३० पूर्वाह्न
मंगलवार
समाप्त
सितंबर २९, २०२६
०९:०३ पूर्वाह्न
मंगलवार
अवधि
२१ घंटे २८ मिनट
प्रारंभ
अक्टूबर १४, २०२६
०६:३४ पूर्वाह्न
बुधवार
समाप्त
अक्टूबर १५, २०२६
०४:०३ पूर्वाह्न
गुरुवार
अवधि
४ घंटे ५० मिनट
प्रारंभ
नवंबर ११, २०२६
०६:४७ पूर्वाह्न
बुधवार
समाप्त
नवंबर ११, २०२६
११:३८ पूर्वाह्न
बुधवार
अवधि
१५ घंटे ० मिनट
प्रारंभ
दिसंबर १८, २०२६
०४:१० अपराह्न
शुक्रवार
समाप्त
दिसंबर १९, २०२६
०७:१० पूर्वाह्न
शनिवार

अमृत सिद्धि योग २०२६ – वैदिक ज्योतिष का अत्यंत शुभ योग

अमृत सिद्धि योग वैदिक ज्योतिष में सबसे शुभ योगों में से एक माना जाता है। यह तब बनता है जब विशेष नक्षत्र किसी विशेष वार के साथ आता है।

"अमृत" का अर्थ अमरता या अमृत है और "सिद्धि" का अर्थ सफलता है। इसलिए अमृत सिद्धि योग दीर्घकालीन सफलता और शुभ फल देने वाला माना जाता है।

खगोलीय आधार

अमृत सिद्धि योग का निर्माण वार और नक्षत्र के विशेष संयोजन से होता है। इसकी गणना पंचांग के अनुसार चंद्रमा के नक्षत्र गोचर के आधार पर की जाती है।

ज्योतिषीय महत्व

अमृत सिद्धि योग को व्यापार प्रारंभ करने, निवेश करने, संपत्ति खरीदने, शिक्षा शुरू करने और धार्मिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

इस योग में किए जाने वाले शुभ कार्य

इस समय लोग नया व्यवसाय शुरू करते हैं, कीमती वस्तुएं खरीदते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और दीर्घकालीन योजनाओं की शुरुआत करते हैं।

वार और नक्षत्र के संयोजन

अमृत सिद्धि योग तब बनता है जब कुछ विशेष नक्षत्र विशेष वार के साथ एक ही समय पर आते हैं। इन संयोजनों का उल्लेख पारंपरिक पंचांग और मुहूर्त ग्रंथों में मिलता है। जब नीचे दिए गए वार और नक्षत्र के संयोजन बनते हैं, तब अत्यंत शुभ अमृत सिद्धि योग का निर्माण होता है।

  • रविवार - हस्त नक्षत्र
  • सोमवार - मृगशीर्ष नक्षत्र
  • मंगलवार - अश्विनी नक्षत्र
  • बुधवार - अनुराधा नक्षत्र
  • गुरुवार - पुष्य नक्षत्र
  • शुक्रवार - रेवती नक्षत्र
  • शनिवार - रोहिणी नक्षत्र

जब भी पंचांग में ये संयोजन बनते हैं, उस समय को नए कार्य शुरू करने, निवेश करने, व्यवसाय आरंभ करने और धार्मिक या आध्यात्मिक कार्य करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

अमृत सिद्धि योग क्या है?

अमृत सिद्धि योग वैदिक ज्योतिष में वार और नक्षत्र के विशेष संयोग से बनने वाला शुभ योग माना जाता है। जब किसी विशेष नक्षत्र का संयोग एक निश्चित वार के साथ होता है, तब यह योग बनता है। पंचांग में इसे अत्यंत शुभ मुहूर्त के रूप में देखा जाता है और कई लोग महत्वपूर्ण कार्य इसी समय प्रारंभ करना पसंद करते हैं।

यह योग कितनी बार बनता है?

अमृत सिद्धि योग चंद्रमा के नक्षत्र गोचर पर आधारित होता है, इसलिए यह वर्ष में कई बार बन सकता है। इसकी सटीक तिथि और समय पंचांग या ज्योतिषीय गणना से निर्धारित किए जाते हैं।

अमृत सिद्धि योग क्यों महत्वपूर्ण है?

ज्योतिष मान्यता के अनुसार इस योग में आरंभ किए गए कार्य दीर्घकाल तक सफल और स्थिर रहने वाले माने जाते हैं। इसी कारण लोग नए कार्य, निवेश या शुभ शुरुआत के लिए अमृत सिद्धि योग का विशेष महत्व मानते हैं।